Tuesday, October 29, 2024

हनुमान चालिसा, Hanuman chalisa,Chalisa


            हनुमान चालिसा

जो हर दिन हनुमान चालीसा का पाठ करता है उस पर हनुमान जी के साथ ही साथ रामजी और भगवान शिव पार्वती की भी कृपा रहती है। और जिस पर रामजी की कृपा हो जाती है उस पर तो सभी की कृपा होती है, इसलिए ही तो कहते हैं कि, जा पर कृपा राम की होई, ता पर कृपा करहिं सब कोई। तो हनुमानजी के साथ रामजी की कृपा पाने के लिए हर दिन खास तौर पर मंगलवार और शनिवार को हनुमान चालीसा का पाठ जरूर करें।


        दोहा
श्रीगुरु चरन सरोज रज, निजमन मुकुरु सुधारि। बरनउं रघुबर बिमल जसु, जो दायक फल चारि।।
बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार। बल बुधि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार।।





चौपाई
जय हनुमान ज्ञान गुन सागर। जय कपीस तिहुं लोक उजागर।।
राम दूत अतुलित बल धामा। अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा।।

महाबीर बिक्रम बजरंगी। कुमति निवार सुमति के संगी।।
कंचन बरन बिराज सुबेसा। कानन कुण्डल कुँचित केसा।।

हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजे। कांधे मूंज जनेउ साजे।।
शंकर सुवन केसरी नंदन। तेज प्रताप महा जग वंदन।।

बिद्यावान गुनी अति चातुर। राम काज करिबे को आतुर।।
प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया। राम लखन सीता मन बसिया।।

सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा। बिकट रूप धरि लंक
 जरावा।।
भीम रूप धरि असुर संहारे। रामचन्द्र के काज संवारे।।

लाय सजीवन लखन जियाये। श्री रघुबीर हरषि उर लाये।।
रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई। तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई।।

सहस बदन तुम्हरो जस गावैं। अस कहि श्रीपति कण्ठ लगावैं।।
सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा। नारद सारद सहित अहीसा।।

जम कुबेर दिगपाल जहां ते। कबि कोबिद कहि सके कहां ते।।
तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा। राम मिलाय राज पद दीन्हा।।

तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना। लंकेश्वर भए सब जग जाना।।
जुग सहस्र जोजन पर भानु। लील्यो ताहि मधुर फल जानू।।

प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं। जलधि लांघि गये अचरज नाहीं।।
दुर्गम काज जगत के जेते। सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते।।

राम दुआरे तुम रखवारे। होत न आज्ञा बिनु पैसारे।।
सब सुख लहै तुम्हारी सरना। तुम रच्छक काहू को डर ना।।

आपन तेज सम्हारो आपै। तीनों लोक हांक तें कांपै।।
भूत पिसाच निकट नहिं आवै। महाबीर जब नाम सुनावै।।

नासै रोग हरे सब पीरा। जपत निरन्तर हनुमत बीरा।।
संकट तें हनुमान छुड़ावै। मन क्रम बचन ध्यान जो लावै।।

सब पर राम तपस्वी राजा। तिन के काज सकल तुम साजा।।
और मनोरथ जो कोई लावै। सोई अमित जीवन फल पावै।।

चारों जुग परताप तुम्हारा। है परसिद्ध जगत उजियारा।।
साधु संत के तुम रखवारे।। असुर निकन्दन राम दुलारे।।

अष्टसिद्धि नौ निधि के दाता। अस बर दीन जानकी माता।।
राम रसायन तुम्हरे पासा। सदा रहो रघुपति के दासा।।

तुह्मरे भजन राम को पावै। जनम जनम के दुख बिसरावै।।
अंत काल रघुबर पुर जाई। जहां जन्म हरिभक्त कहाई।।

और देवता चित्त न धरई। हनुमत सेइ सर्ब सुख करई।।
संकट कटै मिटै सब पीरा। जो सुमिरै हनुमत बलबीरा।।

जय जय जय हनुमान गोसाईं। कृपा करहु गुरुदेव की नाईं।।
जो सत बार पाठ कर कोई। छूटहि बन्दि महा सुख होई।।

जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा। होय सिद्धि साखी गौरीसा।।
तुलसीदास सदा हरि चेरा। कीजै नाथ हृदय महं डेरा।।

दोहा
पवनतनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप।
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप।।

जय श्रीराम, जय हनुमान, जय हनुमान।

 

Monday, September 16, 2024

shree Ram stuti lyrics ( राम स्तुति)

      ॥दोहा॥
श्री रामचन्द्र कृपालु भजुमन
हरण भवभय दारुणं ।
नव कंज लोचन कंज मुख
कर कंज पद कंजारुणं ॥१॥
कन्दर्प अगणित अमित छवि
नव नील नीरद सुन्दरं ।
पटपीत मानहुँ तडित रुचि शुचि
नोमि जनक सुतावरं ॥२॥

भजु दीनबन्धु दिनेश दानव
दैत्य वंश निकन्दनं ।
रघुनन्द आनन्द कन्द कोशल
चन्द दशरथ नन्दनं ॥३॥

शिर मुकुट कुंडल तिलक
चारु उदारु अङ्ग विभूषणं ।
आजानु भुज शर चाप धर
संग्राम जित खरदूषणं ॥४॥

इति वदति तुलसीदास शंकर
शेष मुनि मन रंजनं ।
मम् हृदय कंज निवास कुरु
कामादि खलदल गंजनं ॥५॥

मन जाहि राच्यो मिलहि सो
वर सहज सुन्दर सांवरो ।
करुणा निधान सुजान शील
स्नेह जानत रावरो ॥६॥

एहि भांति गौरी असीस सुन सिय
सहित हिय हरषित अली।
तुलसी भवानिहि पूजी पुनि-पुनि
मुदित मन मन्दिर चली ॥७॥


॥सोरठा॥
जानी गौरी अनुकूल सिय
हिय हरषु न जाइ कहि ।
मंजुल मंगल मूल वाम
अङ्ग फरकन लगे।
रचयिता: गोस्वामी तुलसीदास

Tuesday, January 23, 2024

5 powerful Hanuman Mantras (भगवान हनुमान के चमत्कारी मंत्रों से आपका जीवन सुखमय और समृद्धि से भरा रहेगा !)

भगवान हनुमान, जिन्हें संकटमोचन के नाम से भी जाना जाता है, हिंदू धर्म में सबसे पूजनीय देवताओं में से एक हैं। उन्हें भक्ति, सेवा और समर्पण का अवतार माना जाता है और उन्हें भगवान शिव का अवतार भी माना जाता है। भगवान हनुमान को अंजनेय, अंजनी पुत्र, बजरंगबली, महावीर, मारुति, पवनपुत्र, आदि जैसे विभिन्न नामों से जाना जाता है। उनके भक्त उनका आशीर्वाद पाने के लिए विभिन्न हनुमान मंत्रों का जाप करते हैं।





भगवान हनुमान को पश्चिम में "वानर देवता" भी कहा जाता है क्योंकि उन्होंने बंदर के सिर और शरीर में जन्म लिया था। वह पवन देवता वायु के पुत्र हैं और भगवान राम के सेनापति भी हैं। भगवान हनुमान ने रामायण के युद्ध में एक प्रमुख भूमिका निभाई और उनका समर्थन किया।

इसके अलावा, देश भर में कई हिंदू द्वारा भगवान हनुमान की पूजा की जाती है। वह अपने साहस, शक्ति, वीरता और चपलता के लिए जाने जाते हैं। वह महान ज्ञान वाले व्यक्ति हैं और उन्हें भगवान शिव का अवतार भी माना जाता है। पवनपुत्र हनुमान भगवान राम के सबसे बड़े भक्त हैं और भगवान के प्रति समर्पण और भक्ति का प्रतिनिधित्व करते हैं।
हनुमान मंत्रों के बारे में
भगवान हनुमान को प्रसन्न करने के विभिन्न तरीकों में से एक है नियमित रूप से हनुमान मंत्रों का जाप करना। ऐसा कहा जाता है कि ये मंत्र बहुत शक्तिशाली हैं और अत्यंत समर्पण के साथ जप करने पर भक्तों की सभी इच्छाएं पूरी करते हैं। विभिन्न उद्देश्यों की पूर्ति के लिए कई प्रकार के हनुमान मंत्र हैं। विभिन्न हनुमान मंत्रों का जाप करके भगवान हनुमान की पूजा करने से भक्तों को सफलता और समृद्धि के लिए भगवान हनुमान का दिव्य आशीर्वाद प्राप्त करने में मदद मिलेगी। ऐसे कई हनुमान मंत्र हैं जो भक्तों के लिए बड़ी संख्या में लाभ सुनिश्चित करते हैं। यहां भक्तों के जीवन में अच्छे स्वास्थ्य, धन, सफलता और प्रचुरता के लिए उनके अर्थ और लाभों के साथ 5 शक्तिशाली हनुमान मंत्र दिए गए हैं-

1. हनुमान मूल मंत्र
"ॐ हनुमते नमः॥"

"ओम हनुमते नमः॥"

अर्थ:

श्री हनुमान जी की जय हो

फ़ायदे:
हनुमान मूल मंत्र का जाप आमतौर पर जीवन में लंबे समय से चली आ रही समस्याओं और कष्टों को दूर करने के लिए किया जाता है। इसे सफलता मंत्र यानी कार्य सिद्धि मंत्र भी कहा जाता है। आमतौर पर यह सुझाव दिया जाता है कि नौकरी में पदोन्नति या व्यवसाय में प्रगति में समस्याओं का सामना कर रहे लोगों को बाधाओं को दूर करने के लिए नियमित रूप से इस मंत्र का जाप करना चाहिए। भक्तों को सहनशक्ति, शारीरिक शक्ति और शक्ति प्राप्त करने के लिए भी इस मंत्र का जाप करना चाहिए।

2. हनुमान बीज मंत्र
“|| ॐ ऐं भ्रीम हनुमते,श्री राम दूताय नम: ||”

“ओम् ऐं भ्रीं हनुमते श्री राम दूताय नमः''

अर्थ:

हम दिव्य भगवान हनुमान से प्रार्थना करते हैं, जिन्हें भगवान राम के दूत और सर्वर के रूप में जाना जाता है। 

फ़ायदे:
हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, नियमित रूप से हनुमान बीज मंत्र का जाप भगवान हनुमान को प्रसन्न करने और उनका दिव्य आशीर्वाद प्राप्त करने के सबसे शक्तिशाली तरीकों में से एक है। हनुमान मंत्र काम के प्रति अधिक एकाग्रता और बेहतर मौद्रिक लाभ में भी मदद कर सकते हैं। यह किसी के मानसिक स्वास्थ्य को स्थिर करने और आनंद और ख़ुशी लाने में मदद करने के लिए जाना जाता है।


3. हनुमान गायत्री मंत्र
“ॐ आञ्जनेयाय विद्महे वायुपुत्राय धीमहि।”

तन्नो हनुमत् प्रचोदयात्॥”

“ॐ आंजनेयाय विद्महे वायुपुत्राय धीमहि।”

तन्नो हनुमत प्रचोदयात्॥”

अर्थ:

हम अंजना के दिव्य पुत्र और पवन देवता वायु के पुत्र से प्रार्थना करते हैं, भगवान हनुमान हमारे मन को ज्ञान और बुद्धि की ओर ले जाएं।

फ़ायदे:
यह मंत्र भक्तों के जीवन को अत्यधिक ऊर्जा और उत्साह से भर देता है। यह भक्तों को सभी प्रकार के खतरों से बचाता है। यह भक्तों की अपने शत्रुओं से लड़ने और उन पर विजय प्राप्त करने की शक्ति और साहस को मजबूत करता है। भगवान हनुमान बुद्धि, निष्ठा, निडरता और भक्ति के प्रतीक हैं। हनुमान गायत्री मंत्र भक्तों को आत्मनिरीक्षण के माध्यम से उनके दोषपूर्ण व्यक्तित्व लक्षणों को ठीक करने में भी मदद कर सकता है। यह एक असाधारण मंत्र है जो किसी की आत्मा को शांत करता है और मानसिक शांति प्रदान करता है।

4. आंजनेय मंत्र
"ॐ श्री वज्रदेहाय रामभक्ताय वायुपुत्राय नमोस्तुते ।"

"ओम श्री वज्रदेहाय रामभक्ताय वायुपुत्राय नमोस्तुते"

अर्थ:

उस परमात्मा को नमस्कार है जिसका शरीर कठोर और बलवान है। वह पवन देवता के पुत्र और भगवान राम के सबसे बड़े भक्त हैं। पवनपुत्र भगवान हनुमान को मैं सदैव प्रणाम करता हूँ।

फ़ायदे:
इस मंत्र का जाप अक्सर भक्तों द्वारा सफलता और बाधाओं को दूर करने के लिए किया जाता है। यह भक्तों को अवसाद या चिंता से बाहर लाने और उन्हें आशा और प्रकाश का बेहतर स्थान देने में भी मदद करता है। जो छात्र विभिन्न परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं और जो लोग लंबे समय से प्रमोशन का इंतजार कर रहे हैं उन्हें इस मंत्र का जाप रोजाना जरूर करना चाहिए। भक्तों को इस मंत्र का जाप गुरुवार के दिन शुरू करना चाहिए और सुबह 11 बार अवश्य जाप करना चाहिए।

5.मनोजवं मारुततुल्यवेगं मंत्र
“मनोज्वम् मारुततुल्यवेगम् जीतेन्द्रियं बुद्धिमतlम् वृद्धम्।”

वातात्मजम् वानरयुथमुख्यम् श्रीरामदूतम् शरणम् प्रपद्ये॥”

“मनोजवं मारुततुल्यवेगं जीतेन्द्रियं बुद्धिमतं वरिष्ठम्।”

वातात्मजं वानरयुथमुख्यं श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये॥”

अर्थ:

इस मंत्र का अर्थ है कि मैं भगवान हनुमान की शरण लेता हूं, जो तेंदुए के समान तेज़ और हवा के समान तेज़ हैं। वह सभी इंद्रियों का स्वामी है. मैं उनसे आग्रह करता हूं कि वे मुझे श्रेष्ठता, शक्ति, बुद्धि और बुद्धि प्रदान करें। वह पवन देवता के पुत्र और सभी वानरों के प्रमुख हैं। अत: मैं भगवान राम के उस दूत को प्रणाम करके उनकी शरण लेता हूं।

फ़ायदे:
इस मंत्र का नियमित जाप करने से पुराने दर्द से राहत मिलती है और गंभीर रोगों पर काबू पाया जा सकता है। नियमित रूप से इसका जाप करने से आस-पास सकारात्मक ऊर्जा आती है। ये हनुमान मंत्र मन पर भी सुखद प्रभाव डालते हैं और जब हम बहुत अधिक सोचते हैं तो मन को शांत करने में मदद करते हैं। यह मंत्र भक्तों के जीवन में वित्तीय स्थिरता, धन और समृद्धि भी लाता है।


ये मंत्र आपको ऊर्जा, शक्ति, बुद्धि, और भक्ति की प्राप्ति में सहायक होंगे और आपको सभी प्रकार की बाधाओं से बचाएंगे।

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            हनुमान चालिसा जो हर दिन हनुमान चालीसा का पाठ करता है उस पर हनुमान जी के साथ ही साथ रामजी और भगवान शिव पार्वती की भी कृपा रहती है...